Saturday, August 23, 2008

पेज़-रैंक के माध्यम से चिट्ठों की दुनिया का विश्लेषण

जानें अपने ब्लॉग की पेज़-रैंक। कौन-कौन से ब्लॉग की है सबसे अधिक पेज़रैंक। अपने ब्लॉग पर अपना ब्लॉग की पेज़ रैंक जोडें






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कल अंकित के तकनीकी ब्लॉग 'Pratham' पर पढ़ा कि लोगों को पेज़ रैंक कैलकुलेट करने में असुविधा हो रही है। वस्तुतः बात ये है कि अंकित ने पेज-रैंक कैलकुलेट करने के जिस वेबसाइट (http://pr.blogflux.com ) का ज़िक्र किया है, वो बहुत कम यूज़र-फ्रैंडली साइट है। अगर मेरी बात पर भरोसा न हो तो 'मोहल्ला' जाकर देखें, जबकि मोहल्ला की पेज़-रैंक 4 है, लेकिन http://pr.blogflux.com/ 0 दिखा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अविनाश यह नहीं समझ पाये कि सही पेज़ रैंक कैसे लगायें अपने ब्लॉग पर।

पहले हम अंकित की बातों को आगे बढ़ाते हुए पेज़-रैंक को समझ लें। आम बोल-चाल की भाषा में समझे तो पेज़-रैंक आपके ब्लॉग/वेबसाइट के पृष्ठों का गूगल सर्च इंजन में दिखाई देने का वरीयता क्रमांक है। यह ध्यान रखें कि गूगल दुनिया के सभी वेबपृष्ठों का पेज-रैंक बनाता है। किसी पृष्ठ का पेज़ रैंक 500 मिलियन चरों (variables) और २ बिलियन पदों (terms) पर निर्भर करता है। जिस पृष्ठ की पेज़ रैंक जितनी अधिक होगी, उसके गूगल खोज परिणाम उतना ऊपर दिखने की सम्भावना होगी। जिसमें सबसे अहम रोल आपके पृष्ठ के इनकमिंग लिंकों का है। मतलब आपके पृष्ठ का जिक्र दुनिया भर में जितनी ज्यादा जगह होगा, आपके पृष्ठ की पेज़ रैंक उतनी अधिक होगी। याद रखें कि किसी संम्पूर्ण वेबसाइट/ब्लॉग की पेज़-रैंक कुछ तो उसी वेबसाइट/ब्लॉग के किसी खास पृष्ठ की पेज़ रैंक कुछ और हो सकती है।

मोटे-मोट तौर पर कहें तो आपका ब्लॉग जितने अधिक ब्लॉगों, वेब डायरेक्टरियों इत्यादि पर लिंकित होगा, पेज़ रैंक उतनी अधिक होगी। आप चिट्ठाजगत द्वारा दिये जाने वाले सक्रियता क्रमांक को भी एक तरह का पेज़ रैंक समझ सकते हैं। लेकिन चूँकि यह 'टर्म' गूगल की देन है, इसलिए हम कर नहीं सकते । लेकिन चिट्ठाजगत वाले भी आपके ब्लॉग के करोड़ ना सही, कुछ पहलुओं का इस्तेमाल करके, सक्रियता क्रमांक देते हैं। इसलिए इसका भी अलग महत्व है।

यह भी ध्यान रखें कि पेज़-रैंक आपके ब्लॉग की ट्रैफिक नहीं बताता, बल्कि गूगल खोज में आने की प्रायिकता बताता हूँ। लेकिन अब जबकि लोगों की वेब-सर्फिंह हैबिट बदल रही है, लोग डायरेक्ट लिंक खोलकर आने की बजाय सर्च से आते हैं (अपनी ज़रूरत की चीज़ों को खोजतेर), इसलिए गूगल सर्च से आपके पास उसी अनुपात में लोग पहुँचेंगे, जिस अनुपात आपकी रैंक होगी। गूगल की पेज रैंक 10, याहू की 9 तथा एमएसएन और एवोएल की पेज़-रैंक क्रमशः 8-8 है।

हिन्दी के ब्लॉग और ब्लॉग एग्रीगेटरों के पेज़ रैंक पर मैंने गहन पड़ताल की है और पाया है कि हिन्दी के दो ऐसे ब्लॉग है जिनका पेज़ रैंक 5 हैं। एक तो आलोक कुमार का 'नौ दो ग्यारह' जिसे हिन्दी का पहला ब्लॉग होने का गौरव प्राप्त है। और दूसरा है सबसे मशहूर ब्लॉगर रवि रतलामी का हिन्दी ब्लॉग। रवि-रतलामी पहले ऐसे हिन्दी ब्लॉगर भी हैं, जो अपने ब्लॉगों से धन कमाते हैं। अब इनमें जीतू का नाम भी जुड़ गया है।

हिन्दी ब्लॉग की दुनिया का मेरा अवलोकन

दो प्रसिद्ध ब्लॉग-एग्रीगेटर चिट्ठाजगत और ब्लॉगवाणी की पेज़रैंक 4 है। ज़रा सोचें कि ये दोनों एग्रीगेटरों के लिंक 2000 से भी अधिक ब्लॉगों पर हैं, फिर भी इनके पेज़ रैंक कम हैं। इसकी दो मुख्य वज़हें हैं-

1. इनका नया होना। जबकि आलोक जी का और रवि रतलामी जी का ब्लॉग 2004 में ही शुरू हो गया था।
२॰ ब्लॉग के पृष्ठों का फेवरिट में सुरक्षित होना, डायरेक्टरी में टैग होना, जबकि एग्रीगेटर में ऐसा नहीं हो पाया है।

वहीं ऐसे ढेरों हिन्दी ब्लॉग हैं जिनकी पेज़रैंक 4 है। जिनका मैं चेक कर चुका हूँ उनमें हिन्दिनी (यानी फुरसतिया, ईस्वामी), मोहल्ला, उड़न तश्तरी, हिन्द-युग्म का कविता पृष्ठ, अज़दक, सारथी, एक हिंदुस्तानी की डायरी, मेरा पन्ना, रचनाकार, शब्दों का सफर, मसिजीवी, जोगलिखी, उन्मुक्त, शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग, यूनुस ख़ान का हिंदी ब्‍लॉग : रेडियो वाणी ----yunus khan ka hindi blog RADIOVANI, प्रत्यक्षा, चिट्ठा चर्चा, एक शाम मेरे नाम, घुघूतीबासूती, जो न कह सके, समाजवादी जनपरिषद, गत्यात्मक ज्योतिष्, काकेश की कतरनें, इत्यादि शामिल हैं। यदि आपके ब्लॉग का पेज़-रैंक 4 हो और मुझसे ज़िक्र छूट गया तो बता दें ताकि मैं खुद को अप-टू-डेट कर सकूँ।

हिन्दी के सैकड़ों ऐसे ब्लॉग हैं जिनकी पेज़-रैंक 3 है। पेज़-रैंक का 2 से कम होना अच्छा नहीं माना जाता। मुझे यह जानकर बहुत दुख होता है कि अंग्रेज़ी के बहुत से ऐसे ब्लॉग हैं जिनकी पेज़रैंक 4 या 5 हैं , और वे लाखों में कमा रहे हैं, लेकिन हम हिन्दी वाले अभी हज़ार भी नहीं कमा पा रहे हैं। जबकि यह सच है कि ऑनलाइन एड नेटवर्क की वेबसाइट पेज़रैंक 4 या इससे अधिक वाली वेबसाइट को एड देने से नहीं हिचकिचातीं। लेकिन अफसोस कि वे कहती हैं कि आपकी वेबसाइट का कंटेंट केवल और केवल अंग्रेज़ी में होना चाहिए।

यदि आपके ब्लॉग की पेज़रैंक अभी शून्य है, तब भी घबराने की ज़रूरत नहीं है, नियमित लेखन करें, आप भी 5 पेज-रैंक के मालिक होंगे।

पेज़ रैंक चेक करने का स्मार्ट तरीका

कुछ दिनों पहले मैं किसी ब्लॉग से एक वेबसाइट http://www.compteur.cc/ पर पहुँचा जो ब्लॉग पर तरह-तरह के विज़ेट (widget) लगाने की सुविधा देती है। बहुत ही सुंदर-सुंदर विज़ेट (जिसमें काउँटर, फ्लैश/एनीमेटेड हैडर, एनीमेटेड संदेश, पेज रैंक के विज़ेट शामिल हैं) । पेज़ रैक वाला विज़ेट मैंने हिन्द-युग्म के आवाज़ पृष्ठ पर लगाया भी था। लेकिन इनके विजेट एक ऐसी परेशानी पैदा करते हैं, जो कम से कम अपने पाठकों को बिना किसी लाभ के कोई नहीं देना चाहेगा। एक पॉप-इन विंडो खुलने लगती है, http://www.compteur.cc/ वाले आपको मुफ्त में सेवा तो देते हैं, लेकिन ये साथ-साथ अपने जावा-स्क्रिप्ट में ऐसा खिलवाड़ कर रखा है कि इनके प्रायोजकों का विज्ञापन खुले और वे आर्थिक लाभ कमा पायें। जबकि हम अपने ब्लॉग पर एड नेटवर्क के पॉप-अप/पॉप-इन लगाकर खुद कमा सकते हैं तो फिर http://www.compteur.cc/ को क्यों कमाने दें। इसलिए कम से कम मैं यह सलाह बिलकुल नहीं दूँगा कि आप http://www.compteur.cc/ का विज़ेट इस्तेमाल करें। इनका विज़ेट इतना खराब है कि ये पेज़-लोडिंग टाइम भी बढ़ाता है।

काफी रिसर्च के बाद मैंने पाया कि गूगल की 'अधिकारिक पेज़ रैंक चेक करने वाली वेबसाइट' का दावा करने वाली वेबसाइट http://www.prchecker.info/ सबसे बेहतर और यूज़र फ्रैंडली है। बहुत आसानी से आप भिन्न-भिन्न साइज़ के पेज़-रैंक आइकन (जिसपर आपके ब्लॉग/वेबसाइट का पेज़रैंक भी दिखेगा) लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए हिन्द-युग्म के कविता-पृष्ठ मेरेकविमित्रि का पेज़रैंक इस तरह से दिखेगा (मेरेकविमित्र की पेज़रैंक 4 है)

आपको करना कुछ नहीं है, या तो आप नीचे के फॉर्म में अपने ब्लॉग का पता भरें और पेज़ रैंक यहीं चेक कर लें या इस लिंक से कर लें।



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यदि अपने ब्लॉग के पेज़-रैंक को साइडबार में लगाना चाहते हैं तो यहाँ जायें।

17 comments:

Anil Pusadkar August 23, 2008 at 9:40 AM  

aabhar aapka.page ranking ke bare me apni jaankari shunya thi.is baare me pata kal amit ki post se pata chala aur sari jaankari aaj aapne de di ek baar fir dhanyawad aapko

गरिमा August 23, 2008 at 9:48 AM  

पेज रैन्क के बारे मे जानकारी देने के लिये शुक्रिया।

सजीव सारथी August 23, 2008 at 9:52 AM  

excellent info

avinash August 23, 2008 at 10:03 AM  

अच्‍छी जानकारी है गुरुजी, मैंने तुरत आपके कहे पर अमल किया है। पुराना पेजरैंक वाला स्‍मारक हटा कर नया स्‍थापित कर दिया है। शुक्रिया।

संगीता पुरी August 23, 2008 at 10:04 AM  

मेरे ब्लाग का पेजरैंक भी 4 है। ब्लाग का नाम है-. www.gatyatmakjyotish.wordpress.com

काकेश August 23, 2008 at 10:10 AM  

जरा यहां भी देखें.

http://kakesh.com

पेज रैंक चार बता रिया है. ठीक हैगा?

शैलेश भारतवासी August 23, 2008 at 10:33 AM  

संगीत जी और काकेश जी,

मुझे अपडेट करने का शुक्रिया। मैंने गत्यात्मक् ज्योतिष और काकेश की कतरने को जोड़ दिया है। और भी जिस किसी का हो, बता दें।

अफ़लातून August 23, 2008 at 2:22 PM  

मेरे एक चिट्ठे की स्थिति भी बताई , मेहरबानी , भाई शैलेश ।

Nitish Raj August 23, 2008 at 3:34 PM  

good info but tell how we increase our ranking. by using more english words, caption.

eswami August 24, 2008 at 12:06 AM  

हिंदिनी पर ६०-७० प्रतिशत लोग सीधे आते हैं या गूगल सर्च से! रिफ़रल लिंक्स में ब्लागवाणी,चिट्ठाजगत,नारद,चिट्ठाचर्चा से क्रमवार आते हैं.

ये रैंकिंग भरोसेमंद नहीं है. - गूगल एनालिटिक्स [google.com/analytics] का प्रयोग करें, उनके वेबमास्टर टूल्स का प्रयोग करें, साईट मैप्स का प्रयोग करें, मेटा टैग्स, पोस्ट टैग्स और यूज़र फ़्रैंडली लिंक्स का भी. फ़र्क साफ़ दिखेगा.

Shekhawat August 24, 2008 at 5:08 PM  

जानकारियां अच्छी है ,उपयोगी है |

अजित वडनेरकर August 24, 2008 at 5:38 PM  

अच्छा लेख।
एक जिज्ञासा है। मेरे पीसी पर गूगल टूल बार है। उसके पेज रैंक में शब्दों का सफर कुछ भी नहीं दिखाता है। जबकि वहां हरा मार्कर दिखना चाहिए। यही हाल इस वक्त जब मैं टाईप कर रहा हूं तो आपके ब्लाग का भी है।
ऐसा क्यों ?

Manish Kumar August 25, 2008 at 7:24 AM  

is jaankaari ke liye shukriya

रंजन August 25, 2008 at 11:23 AM  

धन्यवाद

उन्मुक्त August 31, 2008 at 1:25 PM  

मुझे अपने चिट्ठे की पेज रैंक तो पता चली :-)

नरेश सिह राठौङ May 6, 2009 at 9:46 PM  

बहुत अच्छी जानकारी है ।

जसवंत लोधी November 13, 2015 at 1:23 PM  

शुभ लाम ।Seetamni. blogspot. in

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