Tuesday, April 7, 2009

ब्लॉग/वेबसाइट पर गीत (पॉडकास्ट) नहीं सुन पा रहे हैं?

फ्लैश ऑडियो प्लेयर से जुड़ी सभी समस्याओं का निदान

धीरे-धीरे हिन्दी में ऑडियो ब्लॉगों (यानी पॉडकास्ट ब्लॉगों) की संख्या संतोषजनक हो गई है। हिन्द-युग्म आवाज़ ब्लॉग पर पॉडकास्टिंग में रोज़ नये प्रयोग कर रहा है और गैरहिन्दी समर्थकों को भी हिन्दी की गलियों में घुमा रहा है।

इंटरनेट पर ऑडियो फाइल को अंतःस्थापित (Embed) करने के कई तरीके हैं-

1 ॰ ऑडियो फाइल को रीयल प्लेयर की मदद से चलाना

2 ॰ विंडोज मीडिया प्लेयर की मदद से चलाना

3 ॰ याहू के ऑडियो प्लेयर प्लग-इन को ब्लॉग/वेबसाइट में संस्थापित (इंस्टॉल) करना और ऑडियो फाइल के हाइपरलिंक को चलाना।

4 ॰ ऑडियो फाइल को फ्लैश प्लेयर की मदद से चलाना।

चूँकि इसमें से शुरू की दो विधियों से फाइल एम्बेड करने पर बहुत संभव है कि लाइनक्स/मैक्नटॉश प्लेटफॉर्म का प्रयोक्ता तथा फायरफॉक्स ब्राउजर का प्रयोक्ता उस ऑडियो को न सुन पाये। याहू के ऑडियो प्लेयर प्लग-इन की समस्या यह है कि यह वेबसाइट/ब्लॉग का लोडिंग-टाइम बढ़ा देता है। इसलिए अनुभवी वेबसाइट-डेवलपर/ब्लॉगर/पॉडकास्टर फ्लैश आधारित म्यूजिक प्लेयर को अंतःस्थापित करने का रास्ता चुनते हैं और नये पॉडकास्ट ब्लॉगर को भी इसे इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

मैंने यह ग़ौर किया है कि बहुत से श्रोता इस बात की शिकायत करते हैं कि उनके यहाँ ऑडियो प्लेयर नहीं चल पा रहा है और वे गीत/पॉडकास्ट नहीं सुन पा रहे हैं। अमूमन वे निम्नलिखित तरह की शिकायत करते हैं-

1 ॰ मुझे तो ऑडियो प्लेयर ही नहीं दिख रहा है।

2 ॰ ऑडियो प्लेयर तो दिख रहा है, लेकिन प्लेयर पर क्लिक करते ही वह खुल रहा है और तुरंत बंद हो जा रहा है।

3 ॰ प्लेयर चलता है और कुछ सेकेण्ड/मिनट चलने का बाद बंद हो जाता है।

समस्या 2 और 3 को गिलहरीय प्रतिश्रवण (chipmunk playback) कहा जाता है। चूँकि गिलहरी चंचल होती है जो एक ही जगह बार-बार आती और जाती है, वस्तुतः फ्लैश प्लेयर इसी तरह का व्यवहार करने लगता है, इसलिए इसे गिलहरीय प्रतिश्रवण (या सिर्फ Chipmunks) कहा जाता है।

उपर्युक्त तीनों समस्याओं की एक ही वज़ह है, वो है कि आपके सिस्टम पर Adobe फ्लैश प्लेयर का अद्ययावत संस्करण (Updated Version) संस्थापित (Installed) नहीं है। यानी आपको अपने सिस्टम पर प्लैश प्लेयर का नवीनतम संस्करण डालना होगा। याद रखिए कि यदि आप एक से अधिक ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं तो प्रत्येक ब्राउजर के लिए फ्लैश प्लेयर का नवीनतम संस्करण इस्तेमाल करना होगा।

यदि आपको यह नहीं समझ में आ रहा है कि आप एडोब फ्लैश प्लेयर का कौन सा वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं तो घबराइए मत, एडोब की अधिकारिक वेबसाइट (Official website) पर इंस्टॉल्ड फ्लैश प्लेयर का संस्करण चेक करने का टूल उपलब्ध है। आप यहाँ क्लिक करें आपको यह पता चल जायेगा कि आप फ्लैश प्लेयर का कौन-सा है? जैसे मैंने चेक किया, मेरे पास नवीनतम संस्करण (10,0,22,87) संस्थापित है।

यह भी संभव है कि आपके पास बिलकुल नवीनतम संस्करण संस्थापित हो, फिर भी आप पॉडकास्ट नहीं चला पा रहे हों तो उसकी कुछ-एक वज़हें हो सकती हैं-

1 ॰ आपका ब्राउजर के सभी प्लग-इन ठीक तरह से काम नहीं कर रहे। मसलन आपका सिस्टम गलत तरीके से जैसे बिजली के चले जाने से बंद हो गया हो और उस समय आपका यह ब्राउजर खुला हो। इसके लिए आप ब्राउजर को रीपेयर करें या उसे री-इंस्टॉल (पुनर्संस्थापित) करें।

2 ॰ पॉडकास्ट-पेज पर उपलब्ध ऑडियो फाइल एम्बेडिंग की स्क्रिप्ट पूरी तरह से डाउनलोड न हो पाई हो। बहुत संभव है कि आपका नेट कनैक्शन सतत न हो, उसमें क्षणिक व्यवधान आया हो। इसके लिए पेज़ को दुबारा लोड करें, Refresh बटन (या F5) द्वारा।

3 ॰ हो सकता है कि जहाँ (जिस सर्वर स्पेस) पर जावास्क्रिप्ट, फ्लैश प्लेयर की स्किन, ऑडियो फाइलें सुरक्षित हैं, वो डाउन हो, या क्षणांश के लिए डाउन हुआ हो। उसके लिए भी पेज़ रीफ्रेश करें। २-३ बार रीप्रेश होने के बावज़ूद भी आप नहीं चला सकते तो उस पेज को बंद कर दें। सर खपाने से कोई फायदा नहीं :)

फ्लैश प्लेयर के नये संस्करण को संस्थापित करना केवल इसलिए ज़रूरी नहीं है कि इससे आप पॉडकास्टिंग से जुड़ी समस्या से निजात पा सकेंगे, बल्कि इसलिए भी ज़रूरी है कि आप इससे पुराने वर्जन में निहित बहुत से गंभीर सुरक्षा खतरों से भी बच सकेंगे। एडोब के ही अनुसार उसके फ्लैश प्लेयर के नौवें संस्करण में कम से कम 9 सुरक्षा कोमलताएँ (Security vulnerabilities) हैं। एडोब के ही अनुसार- आप जिस वेब पेज को खोलना चाह रहे हैं, बहुत संभव है कि इंटरनेट पर उपलब्ध बहुत से स्पाइवेयर/मॉलवेयर आपको कहीं और पहुँचा दे।

उदाहरण के लिए- आप हिन्द-युग्म का 'आवाज़' पेज खोलना चाह रहे हैं, लेकिन एडोब फ्लैश प्लेयर के पुराने संस्करण में निहित सुरक्षा कमियों के कारण आप किसी पॉर्न (अश्लील) वेबपेज पर पहुँच सकते हैं।

नये इंटरनेट प्रयोक्ता फ्लैश प्लेयर का नया वर्जन कैसे इंस्टॉल करें?

1 ॰ पहले इस लिंक को खोलें.

2 ॰ पहले जाँच लें कि क्या आप जिस ब्राउजर का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहाँ उसी के लिए फ्लैश प्लेयर उपलब्ध है? यदि हाँ तो 'Agree And Install Now' पर क्लिक करें, नहीं तो ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे XP/Vista/Linux इत्यादि) और ब्राउजर चुनें, फिर 'Agree And Install Now' पर क्लिक करें।

3 ॰ फ्लैश प्लेयर की .exe फाइल सिस्टम में उतार लें (डाउनलोड कर लें)।

4 ॰ उस डाउनलोडेड फाइल को रन करें और इंस्टॉल कर लें। याद रखें कि इंस्टाल करते वक़्त संबंधित ब्राउजर की सभी खिड़कियाँ बंद रखें।

5 ॰ यही प्रक्रिया आप सभी ब्राउजर के साथ अपनायें।

जैसाकि आपने पढ़ा कि फ्लैश प्लेयर के पुराने संस्करणों में बहुत सी सुरक्षा कोमलताएँ हैं जिनकी वज़ह से हमारे सिस्टम को बहुत क्षति पहुँचती हैं। ऐसा खुद एडोब के बनाने वाले मानते हैं। तकनीकविद् बताते हैं कि नये फ्लैश प्लेयर के इंस्टॉलेशन के बाद भी फ्लैश प्लेयर का पुराना संस्करण सिस्टम से नहीं हटता। यानी सिस्टम पर वह अपनी तमाम खामियों के साथ विद्यमान रहता है। तकनीकपंडित सलाह देते हैं कि नये संस्करण को संस्थापित करने से पहले पुराने वर्जन को हटाना (अनइंस्टॉल करना) बहुत ज़रूरी है।

पुराना संस्करण कैसे हटायें?

(मूल अंग्रेज़ी ट्यूटोरिय यहाँ उपलब्ध है)

1. निम्नलिखित लिंकों से वांछित अनइंस्टॉलर डाउनलोड करें-

Windows: uninstall_flash_player.exe (205 KB) (updated 2/24/08)
Mac OS X, version 10.3 and above: uninstall_flash_player_osx.dmg (243 KB) (updated 11/05/08)
Mac OS X, version 10.2 and below: uninstall_flash_player_osx.dmg (1.3 MB) (updated 05/27/08)
Mac OS 8.x, 9.x: uninstall_flash_player.hqx (33 KB)

2 ॰ इसे अपने सिस्टम पर वहाँ सेव (सुरक्षित) करें, जहाँ आप आसानी से पहुँच सकते हैं, जैसे डेस्टटॉप पर।

3 ॰ याहू मैसेंजर, एओएल मैसेंजर, गूगल टॉल्क, इंटरनेट एक्सपलोरर तथा अन्य ब्राउजर को बंद करें। अपने सिस्टम के ट्रै ऑइकॉन (सामान्तया सिस्टम के टास्कबार की बिलकुल दायीं तरफ होता है, जिसमें समय और तारीख दिखलाई देते हैं) में से भी उन अनुप्रयोगों को बंद करें, जिसमें फ्लैश का इस्तेमाल संभावित हो।

4 ॰ अब अनइंस्टॉलर का सेट-अप चलायें। यह आपके सिस्टम से एडोब फ्लैश प्लेयर के पुराने संस्करण को हटा देगा।

याद रखिए कि यह अनइंस्टॉलर किसी चल रहे फ्लैश फाइल को नहीं हटायेगा, इसलिए यह सुनिश्चित कर लें कि आप कोई फ्लैश अनुप्रयोग नहीं चला रहे।

मैक्रोमीडिया फ्लैश प्लेयर की IE7 के साथ समस्या

बहुत से प्रयोक्ता यह शिकायत करते हैं कि यद्यपि उनके सिस्टम में फ्लैश प्लेयर का नवीनतम संस्करण संस्थापित है, तब भी मैक्रोमीडिया फ्लैश प्लेयर नहीं काम कर रहा। इस परिस्थिति में आप निम्नलिखित काम करें-

1 ॰ इंटरनेट एक्सप्लोरर की सभी खिड़कियाँ तथा इससे संबंधित विंडोज के सभी अनुप्रयोग बंद करें।
2 ॰ Command Prompt चलायें (यदि आपके पास विंडोज विस्टा है तो Administrator के तौर पर लॉगिन करके)।
3 ॰ C:\Windows\System32\Macromed\Flash पर या C:\Windows\SysWOW64\Macromed\Flash (Windows 64-bit ) पर जायें।
4 . FlashUntil9d.exe चलायें (या संबंधित exe फाइल, जो उस फोल्डर में उपलब्ध है)।
5 ॰ अपना सिस्टम रीस्टॉर्ट करें।

इससे जुड़ा कोई और सवाल हो तो कमेंट में लिखें।



आप फ्लैश प्लेयर आधारित पॉडकास्ट ब्लॉग/वेबसाइट चलाते हों तो निम्नलिखित सूत्र अपने ब्लॉग/वेबसाइट पर जोड़े-

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8 comments:

हिमांशु । Himanshu April 8, 2009 at 5:56 AM  

पोडकास्ट संचालन के लिये यह आलेख महत्वपूर्ण है । काफी विस्तार से अभी पहलुओं पर बात की है आपने । धन्यवाद ।

हिमांशु । Himanshu April 8, 2009 at 6:01 AM  

मैंने पता किया तो मेरे फ्लैश प्लेयर का 10,0,12,36 संस्करण है । क्या इसे पुनः नये संस्करण के इंस्टाल किये बिना भी नये संस्करण के लिये अद्यतित किया जा सकता है ? या पुराने को हटा कर नया संस्करण ही इंस्टाल करना पड़ेगा ?

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' April 8, 2009 at 8:25 AM  

बहुत काम का लेख है, सुन पाएंगे गीत.

जो सुनवायें आप वह, मधुर-मधुर संगीत.

शैलेश भारतवासी April 8, 2009 at 2:43 PM  

हिमांशु जी,

तकनीकविद् तो यही सलाह देते हैं कि आप फ्लैश प्लग-इन को हमेशा अपडेट करते रहें (पुराना हटाकार)। लेकिन चूँकि आपका फ्लैश संस्करण भी 10 के आगे की शृंखला में से एक है, इसलिए मैं ज़रूरी नहीं समझता। जब फ्लैश प्लेयर का 11वाँ संस्करण आये तो इंस्टॉल कर लीजिएगा।

हिमांशु । Himanshu April 8, 2009 at 3:10 PM  

शैलेश जी धन्यवाद ।

इरफ़ान April 11, 2009 at 9:59 PM  

Mujhe bataiye ki Lifelooger band hone ke baad ab sabse kam samay me blog par audio upload kaise karun.
ramrotiaaloo@gmail.com

Sushant Singhal August 11, 2009 at 7:05 PM  

I was delighted to know of this site through Hind-yugm RSS feed and I enjoyed the sweet voice of the winner of Jay Shankar Prasad's poem. But then when I clicked on more links hoping to hear OLD IS GOLD songs by Kishor Kumar, it kept on buffering and buffering and buffering. What could be the problem ? If I hear one song perfectly with my broadband connection, why would it need to buffer sine die ?

BAJRANG BALI UPADHYAY October 16, 2011 at 10:33 AM  

I LIKE VERY MUCH VIVIDH BHARTI.

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